Posts in KYBKYR Campaign 2010-11
किशोरों के लिये यौन शिक्षा क्यों आवश्यक है ?

This article was first published on 21 January 2011.

किशोरावस्था (10-19 वर्ष) वाल्यावस्था और वयस्कता के बीच की नाजुक अवस्था है । इस अवस्था में उत्तेजना, साहस, भावुकता और काम के प्रति उत्सुकता स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होती है। यदि इस अवस्था में होने वाले परिवर्तनों को सही तरीके से नहीं समझा जाये तो किशोर किशोरियाँ गलत रास्ते या भटकाव भरे जीवन में जा सकते है। अत: यौन शिक्षा के माध्यम से किशोरों को किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक तथा सामाजिक परिवर्तनों, यौन एवं यौन संक्रमित रोगों की वैज्ञानिक जानकारी दी जाना आवश्यक है। जिससे उनका शरीर स्वस्थ्य रहे और वे अज्ञानता और भ्रमों से बच सकें।

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The Importance of CSE

Anu was formerly associated with Sahayog in Lucknow, Uttar Pradesh. This article was written on 5 December 2010.

उत्तर प्रदेश में युवाओं को प्रजनन एवं यौनिक स्वास्थ्य एवं अधिकार की जानकारी इस लिए आवश्यक है क्योंकि:

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The Language of Sexuality

Ishita Sharma is a former peer educator at The YP Foundation. This article was written on 5 December 2010.

The language of sexuality that we use at The YP Foundation has evolved over the last few years as our understanding of what the multiple facets of and interconnections within sexuality, gender, rights and health are. It’s been a challenging process and our knowledge of the same has been challenged, redefined, questioned and re-invented. The most important learning principle is that there is little that is static. Our key principles remain the same, but how those are defined and applied is a continuous learning process.

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