The Importance of CSE

Anu was formerly associated with Sahayog in Lucknow, Uttar Pradesh. This article was written on 5 December 2010.

उत्तर प्रदेश में युवाओं को प्रजनन एवं यौनिक स्वास्थ्य एवं अधिकार की जानकारी इस लिए आवश्यक है क्योंकि –

किशोरों में असुरक्षित यौन संबंधों के चलते विभिन्न प्रजनन व यौन संक्रमित बीमारियों जैसे प्रजनन तंत्र संक्रमण (आर.टी.आई), यौन तंत्र संक्रमण (एस.टी.डी), एच. आई. वी. की संख्या बढ रही है।

  • उत्तर भारत की जनसंख्या में एक अध्ययन के अनुसार 3,300 युवाओं में से 15 से 24 वर्ष के 13 प्रतिशत स्कूली बच्चें तथा 33 प्रतिशत वहां कार्यरत लोगों ने बताया कि उन्होंने शादी से पूर्व शारीरिक संबंध बनाये हैं। इनमें से कई युवा एक से ज्यादा साथियों के साथ शारीरिक संबंध रखते थे। लेकिन उन्हें जानकारी व सेवाओं के अभाव था जिससे कि वे स्वंय को यौन संक्रमित रोगों से बचा सकते थे।
  • सन 2002 में करीब आधे युवा जा कि अविवाहित और किशोर थे, उन्होनें अपने आखिरी यौन संबंधों के दौरान कंडोम का प्रयोग किया, ये बताया।
  • उत्तर प्रदेश में विवाहित महिलाएं जो कि 15 से 49 उम्र के बीच की है सिर्फ 8.7 प्रतिषत ने बताया कि वे कंडोम का प्रयोग करते हैं।
  • भारत में एच.आई.वी संक्रमित लोगों संख्या 5.1 मिलीयन है।
  • भारत में नये एच.आई.वी संक्रमित लोगों में से 50 प्रतिषत 15-24 साल के युवा है।
  • उत्तर प्रदेश में 2 3 विवाहित महिलाओं को यह मालूम नहीं था कि कंडोम के इस्तमाल से एच.आई.वी का खतरा कम हो जाता है। सिर्फ 74 प्रतिशत पुरुष तथा 40 प्रतिशत महिलाओं ने कभी एडस के बारे में सुना था।
  • सन 2006 के अन्त तक पूरे विश्व में 39.5 प्रतिशत लोग एच.आई.वी एडस से ग्रसित थे। इनमें से 35 प्रतिशत केस 35 वर्ष के युवा हैं। अधिकतर युवाओं को यह असुरक्षित यौन संबंधों के माध्यम से हुआ है।
  • एक अध्ययन की समीक्षा यह बताती है कि 25 प्रतिशत यौन संक्रमित रोगों के मरीज जो सरकारी क्लीनिक में इलाज सेवाओं के लिए आते हैं, 18 वर्ष से कम आयु का हैं।
  • तमिलनाडू में 12 महानों में एक सर्वे के दौरान 3 प्रतिशत अविवाहित पुरुष तथा 5 प्रतिशत अविवाहित महिला युवाओ ने प्रजनन तंत्र संक्रमण, (आर.टी.आई), यौन तंत्र संक्रमण (एस.टी.डी) के लक्षणों के अनुभव बताये जैसे सफेद पानी, अल्सर आदि।

किशोर-किशोरियों के खिलाफ बिना इच्छा के जबरन तथा हिंसक तरीके से यौन संबंध बनाये जाते हैं

  • भारत में 53 प्रतिशत से भी अधिक बच्चों के साथ यौन हिंसा होती है। स्कूल जाने वाले बच्चे के साथ होने वाले यौन हिंसो के लिए लडके और लडकियों के आंकडों में कोई बडा अंतर नहीं है, दोनों के साथ सामान्य रुप से बराबर यौन हिंसा अथवा जबरदस्ती यौन संबंध बनाये जाते हैं। इस यौन हिंसा का काफी गहरा प्रभाव उनके शारीरिक , मानसिक और व्यवहार में आए परिवर्तन के रुप में देखा जा सकता है।
  • यौन हिंसा के शिकार लगभग एक तिहाई बच्चे 16 वर्ष से कम उम्र के हैं।
  • किशोरावस्था में जबरदस्ती यौन संबंध बनाना विवाहित व अविवाहित दोनों ही के साथ होता है। ग्रामीण उत्तर प्रदेश तथा मुम्बई में अधिकतर विवाहित महिलाओं ने कम उम्र में उनके पति द्वारा बनाये गये यौन संबंधों को हिंसक जबरदस्ती बताया।
  • मुम्बई में 20 प्रतिशत युवा महिलायें जो कि गर्भपात के लिए आती हैं, उन्होने बताया कि उनके साथ जबरन यौन संबंध बनाये गये जिसमें 10 प्रतिशत घर में काम करने वाले पुरुषों द्वारा तथा चार प्रतिशत अन्य मामलों में गर्भवती हुई है।

चिकित्सीय निष्कर्ष के अनुसार यौन हिंसा को जब नजरअंदाज करने के कारण अवसाद, तनाव और व्यवहार में काफी बदलाव आ जाता है। इसका आगे काफी बुरा असर होता है जैसे नकारात्मक व्यवहार, नशे का शिकार होना, पढाई में कमजोर होना, अपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त होना आदि।