Ladki ki galti, sexual harassment in public spaces and parental control: deconstructing the narratives

The YP Foundation as part of its Know Your Body, Know Your Rights programme transacts in community based comprehensive sexuality education (CSE) sessions with girls and young women in partnership with field based organizations. At the end of this year’s phase of work, girls from one of the centres (Samarpan organization in Kishangarh, Delhi) ran a facilitated campaign on sexual harassment in public spaces to engage with their mothers and other community members on the issue. During the CSE sessions, many of them at different junctures brought in their experiences of sexual harassment and the difficulty in talking about it with their mothers. Many of them also shared their experiences of fighting with their parents to come to the centre as their parents weren’t allowing them to attend the sessions for reasons like, it is unsafe to go out for them, why would they want to know about “these things” at such a young age and school education is more important than “these things”.

Putting the 'C' in CSE: A Glossary of Important Terms

Comprehensive Sexuality Education has evolved from sex education, to sexuality education, and finally into its present form. CSE, like we have said before, covers a vast array of issues and topics within sexual and reproductive health. Across the world, however, there is considerable push to limit the scope of CSE and omit certain ‘controversial’ issues. Problem is, different countries find different topics controversial; some consider abortion contentious, while others have a problem with the word ‘sex’ itself! This selective acceptance of sexuality education must be resisted, since it is these uncomfortable, debatable, and differentially interpreted topics that most adversely affect our sexual and reproductive lives and health. 

With this in mind, The YP Foundation has put together a helpful glossary of terms that must be a part of any sexuality education curriculum for it to be comprehensive!

किशोरों के लिये यौन शिक्षा क्यों आवश्यक है ?

This article was first published on 21 January 2011.

किशोरावस्था (10-19 वर्ष) वाल्यावस्था और वयस्कता के बीच की नाजुक अवस्था है । इस अवस्था में उत्तेजना, साहस, भावुकता और काम के प्रति उत्सुकता स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होती है। यदि इस अवस्था में होने वाले परिवर्तनों को सही तरीके से नहीं समझा जाये तो किशोर किशोरियाँ गलत रास्ते या भटकाव भरे जीवन में जा सकते है। अत: यौन शिक्षा के माध्यम से किशोरों को किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक तथा सामाजिक परिवर्तनों, यौन एवं यौन संक्रमित रोगों की वैज्ञानिक जानकारी दी जाना आवश्यक है। जिससे उनका शरीर स्वस्थ्य रहे और वे अज्ञानता और भ्रमों से बच सकें।

यौनिकता शिक्षा: युवा पीढी की जरुरत

यौनिकता इन्सान होने का बहुत महत्वपुर्ण अंश है। यौनिकता केवल हमारे शरीर ही नहीं, उसके साथ हमारी समझ, विचार, स्वभाव, संस्कार, आस्था, विश्वास, शारीरिक आनन्द, इतिहास, धर्म, समाज एवं  आर्थिक स्थिति का समावेश है।

सबको अपनी यौनिकता चुनने का अधिकार है क्योंकि हम सब अलग है, विभिन्न है जिसके वजह से हमारी समाज मे एक पहचान हैं। समाज को किसी की उम्र, लिंग, जाति, गोत्र, यौनिकता, धर्म के आधार पर भेद-भाव नहीं करनी चाहिए। चाहे कोई परलैंगिक, द्विलैंगिक या समलैंगिक हो इस मे शर्माने या हिचकिचाने की जरूरत नहीं होती, सभी को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का जन्मसिद्ध अधिकार है।

यौनिकता शिक्षा एक व्यक्ति के युवा जीवन का एक ऐसा अंग है जिसके बिना वह अधूरा है। युवा मन मे ऐसे अनेक सवाल उठते है जिसका कोई जवाब नहीं देता और माता, पिता और शिक्षिक केवल इतना कहते है कि अभी वह बहुत छोटे है और उन्हें ऐसी बातों के बारे मे सोचना नहीं चाहिए, इस से ना तो वह कुछ समझ पाते है और बड़े होते हुए उनमे यौनिकता एवं यौन क्रिया के प्रति भय एवं जिज्ञासा उत्पन्न होती है।

युवा पीढी को जरूरत है कि उन्हें कोई यौन रोग और यौन अत्याचार के बारे मे जानकारी दे। युवक/युविकाओं को समझना होगा कि उनका शरीर केवल उनका है और किसी को भी उनसे बिना पूछे उन्हें छुने का हक नहीं है। इसके साथ ही उन्हें अपने इच्छाओं को समझना होगा और उसके परिणामों के बारें मे सोचना होगा। इसी कारण उन्हें इन विषयों पर शिक्षा मिलनी चाहेए।

यौनिकता और युवा शिक्षा साथ साथ चलते है। युवा पीढी को अपनी जिंदगी कैसे जीनी है ये उन पर निर्भर है लेकिन उन्हें अपने निश्चय का नतीजा जानना आवश्यक है।

The Importance of CSE

Anu was formerly associated with Sahayog in Lucknow, Uttar Pradesh. This article was written on 5 December 2010.

उत्तर प्रदेश में युवाओं को प्रजनन एवं यौनिक स्वास्थ्य एवं अधिकार की जानकारी इस लिए आवश्यक है क्योंकि:

The Language of Sexuality

Ishita Sharma is a former peer educator at The YP Foundation. This article was written on 5 December 2010.

The language of sexuality that we use at The YP Foundation has evolved over the last few years as our understanding of what the multiple facets of and interconnections within sexuality, gender, rights and health are. It’s been a challenging process and our knowledge of the same has been challenged, redefined, questioned and re-invented. The most important learning principle is that there is little that is static. Our key principles remain the same, but how those are defined and applied is a continuous learning process.